bhoomipatelvineeta, Author at Saavan's Posts

दरिंदगी

कितने दरिंदगी के हाँथ है इस दुनिया में, कि अब इंसानियत का चेहरा शर्म से लाल है। और उस बच्ची का जिस्म खून से बदहाल है। दिल में ख्वाब थे,कन्धों पर किताबों का बोझ , चली जा रही थी स्कूल अपनी तकदीर लिखने , बड़ी मासूम थी उस बच्ची की सोच। पीछे आहट थी कुछ काले क़दमों की, और वो ही शुरुआत थी इन गहरे जख्मों की। वो दिल्ली की मोमबत्ती पिघल कर , बेह गयी है इस दरिंदगी के दरिये में। वो शख्स नहीं मर्द है,जो देता ऐसे... »

डर

डर अब अँधेरी रातों से नहीं लगता, क्योंकि रातें अपने आगोश में सुला लेती है। डर तो रौशनी की किरणों से लगता है, क्योंकि रौशनी सब कुछ साफ़ साफ़ दिखा देती है। »

बचपन

बारिश के मौसम में कागज़ की कश्ती डूबने का इंतज़ार ही करती रह गयी। और ये बच्चे उड़ने के सपने लिए उस कागज़ को पढ़ते ही रह गए। »

मैदान ए जंग

ज़िन्दगी की जंग के मैदान में, तुम भी खड़े हो मैं भी खड़ी हूँ। फ़र्क है तो इतना की मैं किसी को मारना नहीं चाहती, और तुम किसी और से मरना नहीं चाहते। »

गुस्ताखियाँ

यूं तो अरमानों के इरादे भी परेशान हैं, पानी की बूँदें भी आँखों की बारिश से हैरान हैं| पर जनाब हमारी गुस्ताखियों की भी हद नहीं होती, ऐसी केफ़ियत में अपनी ही परछाई में सुकून ढूँढ लिया करते हैं| »

दुनिया जीतकर मैं ममता हार गयी

चल पड़ी उस राह पर,जहां काटें बहुत थे| माँ, तेरी फूल जैसी गोदी से उतरकर ये काटें बहुत चुभ रहे थे| चलते हुए एक ऐसा काटा चुभा था, कि ज़ख्म से खून आज भी निकल रहा है| माँ, मंजिल पर तो पहुँच गयी हूँ, पर इसकी ख़ुशी मनाने के लिए है तू ही नहीं है| यूं तो मैं तेरी मल्लिका थी, पर मैं तुझे रानी बनाना चाहती थी| लेकिन पता नहीं था मुझे कि तेरे दिल में, मुझे पाने का फ़कीर जिंदा था| माँ, वो तेरे शब्द जो मैंने सफलता के... »

नींद

आजकल नींद सोती है मेरे बिस्तर पर, और मैं तो ख्यालों की दुनिया मैं टहलने निकल जाती हूँ| »

जीतना

मुझको मुझसे जीत कर, खुशियाँ मना रहे थे वो| शायद हारकर जीतने और जीत कर हारने के , उस एहसास से वाकिफ़ न थे वो| »

The Dark Night

She was walking alone on the street, having shoes in foot with cleat. It was the darkest day of her life, like someone stabbed her with knife. Moon was shining, darkness was thriving. In the midst of glimmering whiteness, she was there with forthrightness. Her steps shortened suddenly, frightened by the some steps coming cunningly. Those were the steps of some dolt, they pushed her with a jolt. Sh... »

भारत के रक्षक

इतिहास है आज भी जिस पर मौन, वह है आखिर कौन, वह है आखिर कौन? जो लड़ता रहा हर समय किसी के लिए, और मरता रहा किसी के लिए| रहता है वो सबसे दूर, देश के प्यार में है वो मजबूर| दो देशों की ‘नेतागिरी’, जिसमे है अब सेना ‘गिरी’| जिसकी माँ करती उसके लिए हमेशा इंतज़ार| बेटी कहती है बार बार,लगता है हो गये साल हज़ार आपका करे दीदार| न जाने क्यों बटा है ये जहां, जिसमे ली है लोगों ने पनाह| हर द... »

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