ashmita, Author at Saavan's Posts

मुलाकात

आज मेरी खुद से मुलाकात हो गई चुप थी जमाने से, आज खुद से बात हो गई। »

बात

कोई बात दबी है जहन में मेरे कोई बात चले तो कुछ बात बने »

कितने जमाने आये और गुजर गये

कितने जमाने आये और गुजर गये मुहब्बत के जमाने का असर मगर अब तक है »

जिंदगी

जब हम साथ है तो फासलों का ज़िक्र क्यों करें डर के शागिर्द में जिंदगी बसर क्यों करे »

दफ़न कर दूं

दफ़न कर दूं अब अहसासों को यही इक काम अब ठीक रहेगा »

लापता हूं

क्या ठिकाना है मेरा मुझे नहीं पता लापता हूं अरसे से खुद में कहीं »

अन्नदाता कहलाता हूं

अन्नदाता कहलाता हूं पर भूखा मैं ही मरता हूं कभी सेठ की सूद का तो कभी गोदाम के किराये का इंतजाम करता फिरता हूं बच्चे भूखों मरते है खेत प्यासे मरते है अब किसकी व्यथा मैं दूर करूं मैं ही हरपल मरता हूं अन्नदाता कहलाता हूं »

बेटी घर की रौनक होती है

बेटी घर की रौनक होती है बाप के दिल की खनक होती है माँ के अरमानों की महक होती है फिर भी उसको नकारा जाता है भेदभाव का पुतला उसे बनाया जाता है आओ इस रीत को बदलते है एक बार फिर उसका स्वागत करते है »

वोट डालने चलो सखी री

वोट डालने चलो सखी री

वोट डालने चलो सखी री लोकतंत्र के अब आयी बारी एक वोट से करते हैं बदलाव नेताजी के बदले हम हाव-भाव ! सही उम्मीदवार का करते है हम चुनाव, बेईमानों को नहीं देंगे अब भाव ! आपका वोट है आपकी ताकत लोकतंत्र की है ये लागत सुबह सवेरे वोट दे आओ वोटर ID संग ले जाओ ! »

डर

ख्याल आते तो है मगर दब जाते है कहीं दिल में अक्सर डर जाते है जमाने के कहर से »

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