Mohammad Jafri, Author at Saavan's Posts

Meri Manzil

Meri Manzil

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जान भी तू है ज़िन्दगी तू है

जान भी तू है ज़िन्दगी तू है

जान भी तू है ज़िन्दगी तू है जाने जाँ जाने शायरी तू है खुश्बू-ए-इश्क से धुली तू है मेरी सांसो मॆं बस गई तू है रूबरू ख़्वाब मॆं हक़ीक़त मॆं मेरी रग रग मॆं दौड़ती तू है किरने बिस्तर पे मेरे पड़ती हैं जैसे खिड़की से झांकती तू है शाम के वक़्त छत पे आ जाना मुझको किस दर्ज़ः चाहती तू है फूल जैसा हँसी बदन तेरा उम्र गुज़री मगर वही तू है तेरा आरिफ है मुतमईन जानाँ दूर रह कर भी पास ही तू है आरिफ जाफरी »

तुझको पा कर

तुझको पा कर वो यूँ नहीँ खोती गर महब्बत हक़ीक़तन होती रिज़्क़ अपना वो साथ लाती है बोझ लड़की कभी नहीँ होती सीपियों से न वास्ता अपना दर्दे दिल के हैं खुशनुमाँ मोती लोग खुशियाँ खरीद लेते हैं अपनी औकात ही नहीँ होती भेस बदला तो बन गया लीडर एक टोपी कमीज़ और धोती होगा शिद्दत का ग़म तभी वरना आँख वालिद की यूँ नहीँ रोती फिक्र में तुझको देख कर आरिफ रात भर माँ तेरी नहीँ सोती आरिफ जाफरी »

मिले वो ज़ख्म

मिले वो ज़ख्म के सारे अजीब लगते हैं पराये अपने हमारे अजीब लगते हैं जो तुम थि साथ अँधेरे से दिल बहेलता था जो तुम नहीँ तो सितारे अजीब लगते हैं कली कि शक्ल से मासूमियत झलकती है गूलों नें हाँथ पसारे अजीब लगते हैं अगर चे क़ाबिलियत और न अहलियत कोई सिफारिशात के धारे अजीब लगते हैं मिज़ाजे इश्को महब्ब्त बदल गया आरिफ ये आज इश्क के मारे अजीब लगते हैं आरिफ जाफरी »

ये पानी नहर का गहरा कहाँ है

ये पानी नहर का गहरा कहाँ है समंदर की तरह ठहरा कहाँ है छिपा सकते नहीँ हरगिज़ खुदा से हमारा दूसरा चेहरा कहाँ है हमारी दोसती बे शक़ है उनसे ताअल्लुक़ इस क़दर गहरा कहाँ है चलो माना कि है इन्साफ अंधा कोई मुंसिफ मगर बहरा कहाँ है इसी वादी मॆं है ठण्डी हवायें चमन जैसा है ये सेहरा कहाँ है तुम्हारे हुस्न का चर्चा है लेकिन हमारे इश्क का शोहरा कहाँ है खुशी और ग़म हैं आरिफ धूप छावों जहाँ भी वो रहे पहरा कहाँ है... »

गिरते गिरते ही सम्भलते हैं सब

गिरते गिरते ही सम्भलते हैं सब फ़िर कहीँ आगे निकलते हैं सब ऐसे क़ाबिल तो नहीँ बनता कोई पहले जलते हैं पिघलते हैं सब कौन बच पाया हमें बतलाओ दिल जवानी मॆं फिसलते हैं सब दिल को मिलता है महब्बत से सुकूँ वरना बस आग उगलते हैं सब अपनी खुशियों का तो इज़हार नहीँ दर्द आँसूओं मॆं ढलते हैं सब मैं हूँ मिट्टी का तराशा इंसा हीरे कानों से निकलते हैं सब आज़ भी देखो वही है आरिफ वक़्त के साथ बदलते हैं सब आरिफ जाफरी »

माँ

माँ… कितनी प्यारी प्यारी है माँ खुशबू है” फुलवारी है माँ मेरी पहली पहली चाहत मुझमें नज़र आई जो शबाहत मैं था जब नन्हा सा बच्चा कौन मेरी तक्लीफ समझता मुझको समझा मुझको जाना मेरी इशारों को पहचाना क़दम क़दम चलना सिखलाई गिरने लगा तो दौड़ी आई रोते रोते जब भी आया आँसू पोछा गले लगाया पीर” क़लन्दर “वली पयम्बर माँ का साया सब के सर पर फूल चमन के चाँद सितारे लगते नहीँ तुझ जैसे प्यारे जन्... »

Jagmagaaya hai jab khushi ka charaagh

Jagmagaaya hai jab khushi ka charaagh

जगमगाया  है जब खुशी का चराग़ गुल हुआ बज़्मे  बेबसी का चराग़   था कभी वजह रोशनी दिल की वो अमानत है अब किसी का चराग़   कोशिश की हैं बारहा  लेकिन बुझ गया मेरी आशिकी का चराग़   दिन निकलते हि छिप गया होगा सिर्फ़ साथी थ तीरगी  का चराग़   राहते दिल सुकून का हासिल सब से बढ़कर है  बन्दगी  का चराग़   ज़ख्म दिल के उभर गयें आरिफ जल गया शेरो शायरी का चराग़   आरिफ जाफरी.. »

le jaao

le jaao

चाहिये तो जनाब ले जाओ मेरे ग़म बे हिसाब ले जाओ   सारी बातें तो आप ने कह दीं अब मेरा भी जवाब ले जाओ   रात में काम  जुगनूओं का है डूबता  आफ़ताब ले जाओ जब हक़ीक़त को पा नहीँ सकते क्या करेंगे ये ख्वाब ले जाओ   अपने  वो ख़त वफाये उल्फ़त के अब  हैं  सूखे  गुलाब ले जाओ तुमसे बिछड़े तो टूट कर बिखरे दिल की  मुर्दा किताब ले जाओ   कितना चाहा है तुमको आरिफ  ने हर घड़ी   का  हिसाब  ले  जाओ &n... »

KHUD KO DEKHE’N WO AAINAA HI NAHI’N

KHUD KO DEKHE’N WO AAINAA HI NAHI’N

KHUD KO DEKHE’N WO AAINAA HI NAHI’N WO MILAA JAISE WO MILAA HI NAHI’N KAISE JITE HAI’N.ZINDAGI AARIF JINKE MAA BAAP KA PATAA HI NAHI ARIF ZAFRI   »

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