Anjali Gupta, Author at Saavan's Posts

जब छूटेंगे हम तीरों से

कितने भी जुल्म तुम कर लो, बांध दो कितनी ही जंजीरो से मिटा देंगे तेरी हस्ती पल भर में जब छूटेंगे हम तीरों से »

कहां कह पाती हूँ मैं कुछ तुमसे

कहां कह पाती हूँ मैं कुछ तुमसे अल्फ़ाज जज्बातों का साथ ही नही देते। »

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं

जैसे जैसे मकर संक्रांति के दिन करीब आते हैं उत्सव का माहौल हवा में भर जाता है इतने ध्यान से तैयार किया गया कागज धागे के साथ पतंग बन उड़ जाता है ये कागज की पतंगें बहुत आनंद देती हैं नीले पैमाने पर, एकमात्र खिलौना ये सबको मंत्रमुग्ध कर देती हैं| हज़ारो पतंगे आसमान को भर देती हैं कीमती हीरो की तरह कई आकारो में सभी आँखें को आकाश की ओर मोड़ देती हैं युद्ध की शुरुआत पतंगों के टकराने से होती है पतंग काटने ... »

नई इबारतें

लोग पुराने अफ़साने लिखते है मैं नई इबारतें लिखना चाहती हूं »

मैं मुझी में खो गई हूं शायद

खुद को अब किस जगह ढ़ूढ़ूं अब मैं मैं मुझी में खो गई हूं शायद »

दर्द के हर एक कतरे को

दर्द के हर एक कतरे को सहेज कर रखती हूं मैं कब जाने कौन सा कतरा तुम्हे मेरे करीब ले आये »

चुनावों के इस मौसम में

चुनावों के इस मौसम में फिजा में कई रंग बिखरेंगे अगर कर सके हम अपने मत का सही प्रयोग हम नये युग में नयी रोशनी सा निखरेंगे »

मां

मां तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो सुख-दुख, खुशी-गम हर परिस्थिति में थामें हाथ बिन कुछ कहें ही समझती, मेरे दिल की हर बात मां तुम मेरे लिए ईश सम्‍य हो ।। धैर्य, संतोष व समय प्रबंधन जैसे आत्‍म व जीवन प्रबंधन के गुणों से परिपूर्ण व्‍यक्तित्‍व मां तुम तो हो मेरे सुखद भवितव्‍य का मूल प्रतिरुप, मां तुम ही मेरी एकमात्र आदर्श हो ।। तुम प्‍यार का सागर, तुम भावनाओं की निश्‍चल मूर्ती तुमने ही मुझे सिखाया गिरकर... »

जिंदगी

सोचा था जिंदगी इक पूरी किताब होगी मगर ये तो चंद लफ़्जों में ढ़लकर रह गयी| »

नये साल

नये साल का हम जशन मनायें कैसे बीता हुआ साल बार बार आकर आंखे नम कर जाता है| »

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