Anirudh sethi, Author at Saavan's Posts

सूखी है जमीन

सूखी है जमीन, सूखा आसमान है मगर उम्मीद है कायम, जब तक जान है »

पीर दिल की

पीर दिल की संभाले बैठे थे अरसे से आज पता नहीं कहां से बांध टूट गया| »

लम्हे

अगर लम्हों की क़ीमत जान जाएँ हर इक लम्हे में पोशीदा सदी है »

Ab khyaal bhi log loot ke le gaye

Mere jajbaato ko koi nahi samjata yahan Ghayal haalato ki koi kadr nahi kisi ko Ek khyaal tha jo sirf apna tha Ab khyaal bhi log loot ke le gaye »

शब्दों का खेल

सब शब्दों का खेल है भैया वरना लड़ाई मे तो दोनो ही हारते है »

क्या रे! क्यों शोर मचाता है

क्या रे! क्यों शोर मचाता है जीवन क़ी आपाधापी में क्यों आपा खो जाता है बनियान तेरी फ़टी हुई जैबों में एक कोढी तक नहीं ब्लैक मनी ब्लैक मनी चिल्लाता है क्या रे! क्यों शोर मचाता है जिनका काम है लुटना वो दुनिया को लुटेगें ही फिर इस बात पर इतना क्यों हैरान हो जाता है क्या रे! क्यों शोर मचाता है »

दास्ता

ये दास्ता कहे नहीं कही जाती कोशिशे क़ी कई दफ़ा मगर भूली भी नहीं जाती गुफ़्तगु ए इश्क कभी लफ़्जों से होती नहीं ये वो बात है जो दिल से है समझी जाती »

क्या कहे, क्या लिखे

क्या कहे, क्या लिखे लफ़्ज है ही नही, जो समेट सके जज्बातों को| नहीं कोई जो समझ सके हमारे अजीब से हालातों को | »

इक अरसे बाद

इक अरसे बाद कुछ लिखने को जी किया थमे थे जो अश्क आंखों में वो आज बह गये न जाने क्या दबा था इस दिल में दरिया बनकर बह गया आज सारा दर्द मेरा »

दिलो के गम छुपाये नहीं छुपते

दिलो के गम छुपाये नहीं छुपते कभी अश्कों में, कभी लफ़्जों में निकल आते है वक्त बे वक्त और छोड़ जाते है निशानी खारी खारी सी, काली नीली सी »

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