एखलाक गाजीपूरी, Author at Saavan's Posts

जाने क्या क्या छुटेगा

सब कुछ अपना छूट गया है छूट गई लरिकाइं भी बचपन जिसके साथ गुजारा छूट गया वो भाई भी माँ का प्यारा आँचल छूटा छूट गई अँगनाइ भी पोखर ताल तलैय्या छूटे छूट गई अमराई भी क्या क्या छूटा क्या बतलाऊँ रोजी रोटी पाने में अपनी सारी दौलत छूटी दो सिक्कों को कमाने में बहना बिन है सुनी कलाई डाक से राखी आती है सारे रिश्ते पास हैं लेकिन हम तन्हा हैं ज़माने में बीवी बच्चों का एक छोटा सा संसार बचा है बस जब से अपना गाँव ह... »