Ajay Amitabh Suman, Author at Saavan's Posts

पुलवामा

लकड़बग्घे से नहीं अपेक्षित प्रेम प्यार की भीख, किसी मीन से कब लेते हो तुम अम्बर की सीख? लाल मिर्च खाये तोता फिर भी जपता हरिनाम, काँव-काँव हीं बोले कौआ कितना खाले आम। डंक मारना हीं बिच्छू का होता निज स्वभाब, विषदंत से हीं विषधर का होता कोई प्रभाव। कहाँ कभी गीदड़ के सर तुम कभी चढ़ाते हार? और नहीं तुम कर सकते हो कभी गिद्ध से प्यार? जयचंदों की मिट्टी में हीं छुपा हुआ है घात, और काम शकुनियों का करना होता ... »

कविता बहती है

कविता बहती है कविता तो केवल व्यथा नहीं, निष्ठुर, दारुण कोई कथा नहीं, या कवि शामिल थोड़ा इसमें, या तू भी थोड़ा, वृथा नहीं। सच है कवि बहता कविता में, बहती ज्यों धारा सरिता में, पर जल पर नाव भी बहती है, कविता तेरी भी चलती है। कविता कवि की ही ना होती, कवि की भावों पे ना चलती, थोड़ा समाज भी चलता है, दुख दीनों का भी फलता है। जिसमें कोरी हीं गाथा हो, स्वप्निल कोरी हीं आशा हो, जिसको सच का भान नहीं, वो कोरे श... »

दिल का पथिक

हालात जमाने की कुछ वक्त की नजाकत, कैसे कैसे बहाने भूलों के वास्ते। अपनों के वास्ते कभी सपनो के वास्ते, बदलते रहे अपने उसूलों के रास्ते। कि देख के जुनून हम वतनों की आज, जो चमन को उजाड़े फूलों के वास्ते। करते थे कल तक जो बातें अमन की, निकल पड़े है सारे शूलों के रास्ते। खाक छानता हूँ मैं अजनबी सा शहर में, क्या मिला खुदा तेरी धूलों के वास्ते। दिल का पथिक है अकेला”अमिताभ” आज, नाहक हीं चल पड़ा ... »

जय हो , जय हो नितीश तुम्हारी जय हो .

जय हो , जय हो नितीश तुम्हारी जय हो .

जय हो , जय हो, नितीश तुम्हारी जय हो। जय हो एक नवल बिहार की , सुनियोजित विचार की, और सशक्त सरकार की, कि तेरा भाग्य उदय हो, तेरी जय हो। जाति पाँति पोषण के साधन कहाँ होते ? धर्मं आदि से पेट नहीं भरा करते। जाति पाँति की बात करेंगे जो, मुँह की खायेंगें। काम करेंगे वही यहाँ, टिक पाएंगे। स्वक्षता और विकास, संकल्प सही तुम्हारा है। शिक्षा और सुशासन चहुँ ओर , तुम्हारा नारा है। हर गाँव नगर घर और डगर डगर, हर ... »