Ajay Nawal, Author at Saavan's Posts

आजादी

आजादी

लहू है बहता सड़कों में आक्रोश है कुम्हलता गलियों में लफ़्जों मे है क्यों नफ़रत का घर आग है फैली क्यों फिजाओं में रंगो में है क्यों बारूद भरा क्यों दीये अंधेरों में रोते है क्यों अजाने आज चीख रही है क्यों आज हम गोलियां बोते है ममतायें क्यों मायूस है आज बचपन आज बिलख रहा है आज क्यों जल रहे है घर भविष्य भारत का सुलग रहा है है अपने को आजाद कहने वाले जरा आंखे तो उठा, नजरें तो मिला कौन सी आजादी, किसकी आजादी... »

लगा है इन्सान खुद को बनाने में

बनाया है खुदा ने इन्सान को दुनिया बनाने के लिए मगर देखिए क्या हो रहा है दुनिया में लगा है इन्सान खुद को बनाने में! »

कागज की कश्ती

कागज की कश्ती

कागज की कश्ती जिसमें तैरता था बचपन कभी बहता था पानी की तेज धारों में बिना डरे, बिना रुके न डूबने का खोफ़ न पीछे रह जाने का डर जिंदगी गुजरती गयी बिना कुछ लिखे जिंदगी के कागज पर लिखा था जो कुछ घुल गयी उसकी स्याही वक्त के पानी में बहकर अब खाली खाली सी है जिंदगी बहने को तरसती है बिना रुक़े, बिना डरे »

सुनो, मैंने भी एक दौर देखा हैं..

सुनो, मैंने भी एक दौर देखा हैं.. पिछले कुछ समय में मैंने एक दौर देखा हैं, मैंने अन्ना का आंदोलन देखा हैं, मैंने निर्भया की माँ देखी हैं, मैंने रोहित वेमुला की लाश देखी हैं, दिल्ली की गद्दी को बदलते देखा हैं, जिनकी गोली नहीं, बल्कि कलम से डर था, उनकी मौत देखी हैं, कभी जो डरकर जात छुपाते थे, उनको खुलकर खुद को चमार कहते देखा, , जो खुद के रेप की रिपोर्ट लिखाने पुलिस स्टेशन तक नहीं जा सकी, आज उसको दूसर... »

जिंदगी किसी कहानी से कम नहीं

अब कलम उठायी है तो कुछ लिख देते है वर्ना जिंदगी किसी कहानी से कम नहीं »

कुछ मरहम लगा देते है

सब हर्फ़ों का खेल है इस खलक में कुछ जख़्म देते है, कुछ मरहम लगा देते है »

निकल जाते है उन रास्तों पर

निकल जाते है उन रास्तों पर जिनकी कोई मंजिल नहीं अंधेरे होते है जिन राहों में मगर कोई अंजुमन नहीं होते है कांटे, कंकड़ फूलों का बागान नहीं बस इक साथी की तलाश होती है जो हमारी तरह इन राहों पे निकला हो »

दमन चक्र में घिरे हुए नर की व्यथा कौन कहे

दमन चक्र में घिरे हुए नर की व्यथा कौन कहे शोषित होती नारी के, आसूओं में कौन बहे दिखती है अंधी दुनिया मुझे अपने चारो ओर ऐसी परायी दुनिया में बोलो कौन रहे ?? »

अभी तो बचा है बदलाव का बीज बनना है

कोई जमीन अभी भी है जहां मैं अभी तक गया नहीं हूं कोई आकाश बचा है अभी भी जहां मुझे पहुंचना है दो परतों के दरम्या मैं ठहरा हआ अभी तो बचा है बदलाव का बीज बनना… »

हाल बिहार के

ऐसी उठा पटक न देखी कभी, न ही सुने शब्द तीखे तर्रार कभी| ये तो entertainment का जमाना है भैया जो जि सब होत रहत है, वरना पब्लिक तो सब जानती है|| »

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