Abhishek Tripathi, Author at Saavan - Page 3 of 8's Posts

मुक्तक 27

तमाम गुलाबो की खुश्बू है तेरे इकरार में साकी , कही ऐसा न हो मैं खुश्बुओं की चाह ही रख लू.. …atr »

मुक्तक 26

तेरी आँखों से पीनी है, मुझे अब रात भर साकी , ज़रा अब फिर पिला दे न , तमन्ना अब भी है बाक़ी. …atr »

मुक्तक 25

ख़ुदा ने क्या दिया तुमको, ख़ुदा ने क्या दिया हमको, की तू है हुस्न की मल्लिका , औ मुझको आशिकी दे दी ..     …atr   »

मैं प्यार दूंगा .

भुला सकोगे न तुम कभी भी , की  तुमको इतना मैं प्यार दूंगा . जो होगा चुलमन वो  होंगी  आँखे , उसी से तुमको निहार लूंगा . मगर रहे याद तुम्हे सदा ये,  उसी में नज़रें उतार लूंगा . तू मेरा साकी मैं रिन्द तेरा,  ये मयकदा ही तेरा बसेरा , पिला कभी तो मेरे हमनफ़स , तुम्हारे दर पे खड़ा हु बेबश , नज़र न फेरो , पिला के जाओ, कसम है दिल में उतार लूंगा .. भुला सकोगे न तुम कभी भी, की तुमको इतना मैं प्यार दूंगा.. …... »

मुक्तक 24

खबर मेरी यहाँ पर पूछते क्या हो एहसास , जरा एक बार मेरे मकान से  गुजरो. तुम्हे मालूम होगा इश्क़ में क्या क्या लुटाते हैं, कभी एक बार इस इम्तिहान से गुजरो. . …atr »

मुक्तक 23

किया है प्यार छुप छुप कर खुदाया , दिल्लगी न की , जमाना ढोंग कहता है हमारे प्यार को साकी . …atr »

नज़र ..

प्रेम  होता  दिलों  से  है फंसती  नज़र , एक तुम्हारी नज़र , एक हमारी नज़र, जब तुम आई नज़र , जब मैं आया नज़र, फिर तुम्हारी नज़र और हमारी नज़र, बन गयी एक नज़र, हो गयी एक नज़र. ये तुम्हारी नज़र या हमारी नज़र, ये हमारी नज़र या तुम्हरी नज़र . बस तुम्हारी नज़र , बस हमारी नज़र, न तुम्हारी नज़र न हमारी नज़र , मैं तुम्हारी नज़र , तुम हमारी नज़र , देखता हु जिधर तू ही आये नज़र , है ये कैसी नज़र ,है ये जैसी नज़र, या है मेरी नज़र या... »

मुझे फिर याद आये.

वो राह वो बस्ती, वो घर, वो गलियां , वो राह के कांटे  , वो फूल और कलियाँ , मुझे फिर याद आये.. वो दो दिलों की धड़कन ,वो दोपहर का साथ, वो शाम का मौसम , हाथो में तेरा हाथ , मुझे फिर याद आये वो बचपनों के खेल, वो प्यार में रुसवाई , वो हार में भी जीत , अब याद और तन्हाई, मुझे फिर याद आये. …atr »

मुक्तक 22

चुपके चुपके ही चाहा है, इज़हार किया न जीवन भर , एक डर में एक संशय में, मैं हाल ए दिल कैसे  कह पाऊँ. जीवन के अंतिम क्षण में यदि बात जुबां तक आ जाये, बस उसी काल मैं तृप्त हुआ ,दुनिया को छोड़ चला जाऊं.. …atr »

ये गीत

ये गीत मेरे न पत्थर है, न कांटे ,न अंगारे है, ये गीत ह्रदय की पीड़ा हैं,वो सब है जो हम हारे हैं. हर लफ्ज़ में उसकी ख़ुश्बू है, हर मतला उसकी भाषा है, हर मक़ता उसका पूजन है, बस इसीलिए ये प्यारे है.. …atr »

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