Abhishek Tripathi, Author at Saavan - Page 2 of 8's Posts

ख़ामोशी

ख़ामोशी

चुप रहता हूँ आजकल , कम बोलने लगा . देख लिया दुनिया को मैंने ,  जान लिया सच्चाई को . अब दिल बरबस रो पड़ता है, इस झूठी तन्हाई पर . इस ख़ामोशी को तुम क्या जानो , पाया कितनी मुद्दत बाद . अब तो सन्नाटे की भी आवाज़ सुनाई देती है , कितना सुन्दर आँखों को दुनिया दिखलाई देती है . चुप हो जाओ , चुप रहने दो ,  कुछ न कहूँगा आज के बाद . ख़ामोशी कितनी प्यारी है , चादर लेके चुपके चुपके  मीठी सी गहराई में , सोने की इच्... »

in your love

Sometimes when there is evening , Come into my  heart . you bother me sometimes, somtimes you make me cry .   Your name in my heart , had been written over the centuries , aspire to your love , MEER  would be God .. …atr »

मेरी याद आएगी

मेरी याद आएगी

क़भी जब गिर के सम्भ्लोंगे  तो मेरी याद आएगी , कभी जब फिर से बहकोगे  तो मेरी याद आएगी। वो गलियां , वो बगीचे ,वो शहर ,वो घर , कभी गुजरोगे जब उनसे तो मेरी याद आयेगी। वो कन्धा मीर का तकिया तुम्हारा वस्ल में जो था, कभी जब नींद में होगे तो मेरी याद  आएगी। मुझे है याद वो पत्थर कि जिनसे घर बनाया था , आँखों ही आँखों से जहाँ सपना सजाया था , मुझे है याद वो आँखे, वो बातें और वो सपना, कभी उस घर से गुजरोगे तो मे... »

मुक्तक  32

मुक्तक 32

हवाओं  की नज़र से देखता हूँ मीर मैं तुझको , कि छूकर पास से निकलूं और तुझको खबर न हो . ये दिल पत्तों सा हिलता है तेरी यादों के आने से,, कभी तो झूम के बरसेगा सावन उम्मीद बाक़ी है . …atr »

मुक्तक 31

दिल  के आइने में मीर तेरा अक्श देखूंगा , कभी सोचा नहीं था तुमपे इतना प्यार आएगा . …atr »

मुक्तक 30

तेरे  जाने  से सब  ये सोचते  है मैं अकेला  हूँ  , उन्हें  शायद खबर न हो कि तेरी याद  बाक़ी है . मैं तनहा कैसे समझूँ मीर इन ख़ाली मकानों को , तेरे और मेरे प्रेम का वो सहज संवाद बाक़ी है. . …atr »

ये गीत मेरे

नैनो के सूखे मेघो से मैं आज अगर बरसात करूँ ,हल करुँ ज़मीन ए दिल में मैं नीर कहाँ से मगर भरूँ?है सूख चुका अब नेत्र कूप न मन का उहापोह बचा ,न मेघ रहा न सावन है ,मिट गया जो कुछ था पास बचा .एक बार हौसला करके मैंने बीज प्रेम के बोये थे ,न मौसम ने रखवाली की ,सावन ने पात न धोये थे .अब न मन है , न मौसम है ,न उर्वर क्षमता धरती की ,न नैनो में अब पानी है ,न दिल में इच्छा खेती की .रोते है मेघ और कूप सभी ,करता ... »

मुक्तक 28

जवां दिल था , जवां धड़कन , जवां सांसे , जवां मन था , मगर बस मीर इतना था, जहाँ वो थी वहां मन था .. …atr »

बस्ती प्यार की

कहीं आसूं  की बारिश थी ,कहीं यादों का झोंका था, जिसे देखा था बस्ती में वही दिन रात रोता था . नगर था प्यार का , उजड़ा था गुलशन , शाम ख़ाली थी, रहूँ कैसे वहां मैं मीर , जहाँ बस ख्वाब सोता था .. …atr »

मुक्तक 29

ढूंढा जिसे गली में, शहरा में शाम में , दीदार उसका हो गया बस एक ज़ाम में. …atr »

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