Abhishek Tripathi, Author at Saavan's Posts

मुक्तक 35

समंदर तेज हो, तीखी हवा हो, पतवार छोटी हो, अगर तुम साथ हो मेरे , परवाह कौन करता है . …atr »

मुक्तक 33

मोहब्बत में जो मैंने की मोहब्बत से बहुत बातें , लबों पर रख के वो बोले बहुत बोला नहीं करते . …atr »

मुक्तक 34

मोहब्बत में चराग़ों से उजाले हुआ नहीं करते , दिलों में आग लगती है,जहाँ रंगीन दिखता है . …atr »

नींद

बड़ी बेदर्द सी रातें है काफ़ी सुन के सोता हूँ, जहाँ तुम याद आती हो , वहीं चुपके से रोता हूँ| ये रोने और सोने का नहीं है सिलसिला लेकिन , कहीं जब दर्द आँखों में चढ़े तब नींद आती है | …atr kafi is a raag of midnight in Indian classical music »

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तुम्हारा अक्स

तुम्हारे अक्स से दुनिया है रोशन , सुना है चाँद की तू चांदनी है . सलीका प्रेम में अब क्या करेगा , नज़र को अब के माफ़ी मिल चुकी है . ज़रा अब दर्द से नहला दो मुझको, वफ़ा की धूल काफी चढ़ चुकी है . समंदर अब के पानी मांगता है ,  सुना है प्यास उसकी बढ़ चुकी है . कहीं पर मीर ने देखा है तुझको , चमक चेहरे के उसकी बढ़ चुकी है. …atr »

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मेरे साकी

तुम्हारी चाह ही मंज़िल हमारी ए मेरे साकी,ज़रा अब तो पिला दे न , तमन्ना अब भी है बाक़ी.मेरे साकी तेरे आँखों की मदिरा क्या बताऊँ मैं,फ़क़त आँखों से चढ़ती है ,मगर दिल तक उतरती है ,उतरना फिर भी वाज़िब था मगर अब ये लगा है कि,उतरकर भी ये चढ़ती है , और चढ़ के फिर उतरती है .   …atr »

नुक्कड़ पर

नुक्कड़ पर

आज गलियां कुछ सूनी सी है , पथिक कम जाते हैं. गलियों के नुक्कड़ पर बैठा मैं कुछ सोचता हूँ . पर क्या क्या जीवन भी पथिक है , कभी रुकता कभी चलता है लेकिन आज उदासी क्यों है , लोग डरे सहमे से हैं , कारन जान नहीं पाता हूँ , कुछ लोगो के नजदीक जाता हूँ, जो चर्चा कर रहें है किसी बारे  में , पूछता हुँ चलकर क्या है  , जाता हूँ तो चुप हो जाते है सब … …atr https://www.facebook.com/atripathiatr »

छुपा है चाँद बदली में…

छुपा है चाँद बदली में…

छुपा है चाँद बदली में ,अमावस आ गयी है क्या?नहीं देखा कभी जिसको वही शर्मा गयी है क्या?मिलन की रात में ये घुप्प अँधेरा क्यों सताता है ?वो मेरा और उसका छुप छुपाना याद आता है..अभी तो थी फ़िज़ा महकी , क़यामत आ गयी है क्या? कभी वो थी कभी मैं था, कभी चंचल चमकती रात, न वो कहती ,न मैं कहता मगर आँखे थी करती बात..जिन आँखों में हया भी थी,कज़ा अब आ गयी है क्या? वो नदियों के किनारो पर जहाँ जाता था मिलने को,वो नदिया... »

मृत्यु : परम  सत्य

मृत्यु : परम सत्य

here is some para frm my long work describing the truth “death”.. hope u all ll like .. वेदो  की  वाणी  भूल  गयी ,ममता  माया  सब  छूट  गयी .. तैयार  लगा  होने  अब  तो  प्रियतम  के  घर  को  जाने  को लो  आज  चली  आई  मृत्यु  हमको  निज  गोद  उठाने  को … संघर्ष किया  था  जीवन  भर  किस  किस  से  लड़ा  किस  किस  को  छला अब  तो  निज  की  सुध  भी  भूली  कर  सकते  है  क्या  और  भला ‘... »

कल्पना

कल्पना

expecting ur reviews and kind attention with ur graceful words .. जब धरा उठ कर बने आकाश तो अच्छा लगे , जब मही की तृप्ति को बादल करे बरसात तो अच्छा लगे. है अँधेरा, धुंध सा है,राह पथरीली बहुत , इस घुटन को चीर कर लूँ साँस तो अच्छा लगे. मन शांत हो, जिज्ञाशु बुद्धि , और दया संचार हो, भीड़ से उठकर कोई बोले “शाबास “तो अच्छा लगे . खोज हो जब सत्य की , और धर्म  का संधान हो , शक्ति और क्षमता करें ... »

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