Abhishek, Author at Saavan's Posts

मैं अकेला….

मैं अकेला था अकेला हूँ अकेला रह गया, ज़िन्दगी की धूप छाँव सब खुशी से सह गया। टूटा हूँ पत्ते सा क्यूँकि मेरी सूखी डाली है, न खता हवा के झोंकों की न दोसी कोई माली है। जबसे तुमने नींव तोड़ी है मेरे विश्वास की, मैं किसी कच्चे मकाँ सा भरभरा के ढह गया। मैं अकेला था अकेला हूँ अकेला रह गया। इक पवन मद्धम सी शीतल है मैं उससे जुड़ गया, बन के वो तूफान मुझको संग लेके उड़ गया, सारे हृदय की पीर बस एक साँस में ही पी ... »