Abhilasha Shrivastava, Author at Saavan's Posts

ज़िद्दी

ये दिल बहुत ज़िद्दी है मेरा! मंज़िल-द़र-मंज़िल सफ़र करता है ठिकाना नहीं कोई इसका, ये सड़कों पर बसर करता है »

यादें

बेवजह, बेसबब सी खुशी जाने क्यों थीं? चुपके से यादें मेरे दिल में समायीं थीं, अकेले नहीं, काफ़िला संग लाईं थीं, मेरे साथ दोस्ती निभाने जो आईं थीं। दबे पाँव गुपचुप, न आहट ही की कोई, कनखियों से देखा, फिर नज़रें मिलाईं थीं। मेरा काम रोका, हर उलझन को टोका, मेरे साथ वक्त बिताने जो आईं थीं। भूले हुए किस्से, कुछ टुकड़े, कुछ हिस्से यहाँ से, वहाँ से बटोर के ले आईं थीं। हल्की सी मुस्कान को हँसी में बदल गईं मेरे... »

सरहद के पहरेदार

मीठी सी है वो हँसी तेरी, आँसू तेरा भी खा़रा है, उन उम्र-दराज़ नज़रों का तू ही तो एक सहारा है। मेंहंदी से सजी हथेली भी करती तुझको ही इशारा है, कानों में गूँजी किलकारी ने पल-पल तुझे पुकारा है। ये सारे बँधन छोड़ के तू ने रिश्ता एक निभाया है, सरहद के पहरेदार तुझे पैगा़म सरहद से आया है। जब-जब धरती माँ जलती है, संग-संग तू भी तो तपता है; सर्द बर्फ़ के सन्नाटे में मीलों-मील भी चलता है। दूर ज़मीं से, नील गगन मे... »