Alvida

जा रही हूँ आज सबसे दूर,
खुद की ही तलाश में।
वहीं, जहाँ छोड़ आयी थी खुद को, किसी की याद में।
पर अब उससे भी ज़्यादा मुझे ज़रूरत है मेरी।
अब ढूंढना है मुझे पहचान क्या है मेरी।
हो सके तो माफ करना मुझे,
मन करे तो याद करना मुझे।
ले जा रही हूँ खुद को सबसे चुरा कर
कहीं दूर…..कहीं दूर… बहुत दूर….. बहुत दूर…

जहाँ मिल सकूं एक बार खुद से,
और पूछ लू एक बार मुझसे,
की क्यों रह गई मैं इतनी अकेली,
कहाँ खो गई मेरी सारी खुशी ।
चल पड़ी हूँ आज खुद को ही ढूंढने,
जा रही हु म खुद को वापस लाने।
जा रही हूँ…..

लेती हूँ विदा अब इस वादे के साथ,
याद रखूँगी वो हर एक बात।
वो मस्ती के पल, यादों के कल,
भूलूँगी न मैं…..
मिलूँगी फिर खुद को तलाश कर,
खुद को सबसे काबिल पा कर।
फिर देखना सब कुछ ठीक हो जाएगा,
हर सपना पूरा हो जाएगा।
अलविदा… अब चलती हूँ मैं खुद की तलाश मे।
हो सके तो कर देना माफ, गर रह जाऊँ मैं याद।
अलविदा…… अलविदा….

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2 Comments

  1. Profile photo of ashmita

    ashmita - January 15, 2018, 1:25 pm

    Thoughtful poem

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