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  • हम तो ख्वाबों की चौखट पर बैठे थे ,
    लेकर हसीन ख्वाब …
    प्यारी आँखों के परदे पर ||

    ख्वाबों को ख्वाब बनाने ,
    आया एक मुसाफिर ,
    रख दिया ख्वाबों को ,
    उसने जलती आग पर ||

    कोशिश बहुत की ,
    ख् […]

  • कोई नहीं है मंजिल न कोई ठिकाना है!
    हरपल तेरी याद में खुद को तड़पाना है!
    मैं कैसे रोक सकूँगा नुमाइश जख्मों की?
    जब शामे-तन्हाई में खुद को जलाना है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • शीत के सवेरे में ,
    गरमागरम राम राम ,
    भज ले मन राम राम ,
    बन जायें बिगड़े काम।

    पल भर निर्मल मन से
    जोभी याद करता है ।
    वह विपदाओं से ,कभी ,
    तिल भर नहीं डरता है ।

    करता है राम नाम हर ,
    विपदाओं का […]

  • मुझको याद फिर तेरा जमाना आ रहा है!
    मुझको याद फिर तेरा फसाना आ रहा है!
    चाहत की मदहोशी से जागी है तिश्नगी,
    मुझको याद तेरा मुस्कुराना आ रहा है!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • Dosto गोरखपुर में हो रहे मासूम बच्चों की मौत बहुत ही दूखद हैं मेरे चार शब्द उन बच्चों नाम (( plz god sef the all children’s ))

    एक एक कर जिन्दगीया निगलती जा रही हैं ये ,
    एक अनसुलझी पहेली बनती जा रही हैं य […]

  • माँ महेंगे होटलो मे भी (“रहस्य”)

    तेरी हाथों कि वो दो रोटियाॅ कहीं और बिकती नहीं
    माँ महँगे होटलों में भी खाने से भूख मिटती नही
    “”””””””””
    “”””””””””
    गरमाहट बहुत मिलती थी तेरी ऑचल कि ऑड मे मुझे
    अ […]

  • दुआएं सुबह करें ,शाम करें ,
    प्यार कुछ मित्रता के नाम करें ।
    अपने हर मित्र का भला चाहें ,
    जिंदगी मित्रता का धाम करें।
    जानकी प्रसाद विवश
    प्यारे मित्रो….
    सपरिवारसहर्ष ,
    मित्रतामय सवेरे […]

  • Happy mother day मेरे तरफ से एक छोटी सी कोशिश उम्मीद करता हूँ सबको पसंद आएगा
    €€€€€€€€€€€€€
    ऐसी बेबसी भरी जिन्दगी देने की वजहा बता देता,
    ऐसा क्या किये थे तू मुझे मेरी […]

  • एक और मासूम की जिन्दगी (“रहस्य”)
    😐😐😐😐😐😐
    दौलत की चाहने रिश्तों के धागे को तार तार कर दिया हैं,
    एक और मासूम की जिन्दगी को मरने पर लाचार कर दिया हैं,,
    😌😌😌😌😌😌
    पापा सब दिया आपने इन्हें मेरी सूख खूशीओ की खातीर, […]

  • मुर्दों को उठाने चलें है ” रहस्य “देवरिया

    अफ़सोस की हम सबको जगाने चलें है ,
    हाँ ये सच है की मुर्दों को उठाने चलें है,,

    हर हिन्दू मस्त है अपनें मे जमाने से बेखबर ,
    उनको आनें वाली सच्चाई अब दिखाने चलें है […]

  • जिस्म को मेरे जलाये होंगे “रहस्य”देवरिया

    दर्द कितने खुद में हमने छुपाये होंगे ,
    तूने जब दिल को मेरे जलाया होगा ,

    ये रूह मायूस बेबस होकर तूझ से ,
    जब तन्हाई में खुद को छुपाया होगा ,

    मेरा साया […]

  • जिस्म को मेरे जलाये होंगे “रहस्य”देवरिया

    दर्द कितने खुद में हमने छुपाये होंगे ,
    तूने जब दिल को मेरे जलाया होगा ,

    ये रूह मायूस बेबस होकर तूझ से ,
    जब तन्हाई में खुद को छुपाया होगा ,

    मेरा साया […]

  • उनसे गुफतगू ना हो “रहस्य “देवरिया

    ऐ खुदा काश कि अब से वो रूबरू ना हो ,
    ख्वाबों में भी अब उससे गुफतगू ना हो ]

    कम्बख्त झूठे सपने देखना कौन चाहता है,
    वो रात ही ना हो जिसमें निंद पूरी ना हो ]

    याद ना कर […]

  • उनसे गुफतगू ना हो “रहस्य “देवरिया

    ऐ खुदा काश कि अब से वो रूबरू ना हो ,
    ख्वाबों में भी अब उससे गुफतगू ना हो ]

    कम्बख्त झूठे सपने देखना कौन चाहता है,
    वो रात ही ना हो जिसमें निंद पूरी ना हो ]

    याद ना करू ये तो तेरी दिली ख्वाहिश थी,
    ना आ सामने कही ये हसरत पूरी ना हो ]

    ऐ खुदा काश कि अब से वो रूबरू ना हो %

    ” रहस्य “देवरिया

  • सुवह सुवह
    ये गुनगुनी सी ,
    धूप रूप की ,

    लगी है
    सेंकने ये ,
    शीत -थरथराए तन ।

    उमग
    जगाने लगी ,
    मन में तपन प्यार की ,

    कि रूप का अलाव
    तापे , थरथराया ,
    तन और मन ।

    जानकी […]

  • लम्हे बचें जो जिंदगी के वो खुल के काट लें,
    जो बाकी रह जाए पिटारे में उसे आपस में बांट लें,

    वो नीले समंदर के किनारे,
    पिघले मोती से अंगारे,
    चल ख्वाहिशों की मुट्ठी में बांध लें,

    वो रंगीन लम्हे जिं […]

  • रास्ताें से गुजरते हुए ईक शहर नजर आया,
    जिससे उढते धुएँ में इंसानियत का रिसता खुन नज़र आया,

    हँसते हुए चेहराे में, खुद को झूठा साबित करता हर इंसान जाे पाया,
    तब कहीं जाकर हमें भी कलयुग की रामलीला का सार सम […]

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