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New Poems

मुक्तक

मुक्तक

हर शख्स निगाहों में प्यार लिए रहता है! हर वक्त जेहन में खुमार लिए रहता है! जब कभी रुक जाती है राह मंजिलों की, दर्द का जिगर में बाजार लिए रहता है! मुक्तककार- #महादेव'(23) »

मुक्तक

मुक्तक

जब भी यादों की तस्वीर नजर आती है! तेरे ख्यालों की जागीर नजर आती है! मैं जब भी ढूँढता हूँ जिन्दगी की राहें, तेरी बाँहों में तकदीर नजर आती है! महादेव की कविताऐं’ »

ग़ज़ल

अक्सर खुशी का रिश्ता ग़म से होता है इसीलिए हँसी में भी आँख नम होता है   मेरे हाल पर हँसने वालों ज़रा गौर करो वक़्त ही तो है हरदम बदल रहा होता है सुना है दर्द हद से गुज़रे तो लफ्ज़ होता है तो लिखो किताब यहां पूरी ग़ज़ल होता है जिंदगी के फ़लसफ़े से गुजरे तो जाना जिंदगी है,खेल इसका भी अजीब होता है   हर दिल मे कोई न कोई ग़म होता है खैर छोड़ो सबका अपना राज़ होता है “विपुल कुमार मिश्र” #VIP~   »

अपने ही सूरज की रोशनी में

अपने ही सूरज की रोशनी में मोती–सा चमकता औस का कतरा है आज़ वो जो कल तक था अंधेरे में जी रहा।   कितनो की आँखों का तारा है आज़ वो जो कल तक था अज़नबी बनकर जी रहा।   दूसरो के कितने ही कटे जख्मों को  है वो सी रहा लेकिन अपने ग़मों को अभी भी वो खुद ही है पी रहा।     कितनी ही बार जमाने ने उसे गिराया लेकिन वो फिर–फिर उठकर जमाने को ही सँवारने की तैयारी में है जी रहा।   अपने दीया होने का उसने कभी घमण्ड नहीं किया तभी तो आज़ वो सूरज सी चमक लेकर है जी रहा।     जीवन कि दिशा पाकर आज़ वो दुनियाँ को है जीत रहा जो कल तक था खुद से ही हारा हुआ सा जी रहा।   अपनी मौत का भी डर नहीं अब उसको क्योंकि उसे मालूम हो गया कि गडकर इन पन्नों पर वो सदियों तक होगा जी रहा।                                                 &#... »

ख़ुशी क्या है ?

क्या सिर्फ चेहरे पर बनी कुछ लकीरें तय करती हैं ख़ुशी ? या फिर किसीके पूछने पर ये कह देना “मैँ खु़श हूँ” इससे ख़ुशी का पता लग सकता है ?   — KUMAR BUNTY »

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