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मुक्तक

मुक्तक

आज फिर मौसम में नमी सी आ रही है! जिन्दगी में तेरी कमी सी आ रही है! आ गया है रूबरू कारवाँ ख्यालों का, यादों की लहर शबनमी सी आ रही है! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय’ »

मुक्तक

मुक्तक

मुझसे खता हुई है तुमसे दिल लगाने की! तुम भी भूल गये हो राहें पास आने की! फैली हुई दरारें हैं चाहत के दरमियाँ, कोशिशें नाकाम हैं जख्मों को भुलाने की! मुक्तककार -#मिथिलेश_राय »

मुक्तक

मुक्तक

जी रहा हूँ मैं तो अश्कों को पीते-पीते! जी रहा हूँ मैं तो जख्मों को सीते-सीते! खोया हुआ सा रहता हूँ चाहत में तेरी, मर रहा हूँ मैं तो यादों में जीते-जीते! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय »

जमाने बीत गए जिनको भुलाये हुए आजफिर हैं क्यो याद वही आये हुए कितने बेरुखी से तोड़े थे वो दिल को दिल के टूकड़ो को हैं हम सम्भाले हुए सोचते थे न आएगी क़यामत कभी ये क्या हुआ वो हैं दर पे आये हुए जिसे छूने की चाहत में उम्र गुज़ार दी ज़नाज़े को मेरे हैं वही गले से लगाये हुए जिन्दा था तो तन्हाई ने मार डाला,मौत पे अपने तो ठीक दुश्मन भी रोते हैं आये हुए “विपुल कुमार मिश्र” »

मुक्तक

मुक्तक

राहे-वक्त में तुम बदलते जा रहे हो! तन्हा रास्तों पर तुम चलते जा रहे हो! दूर-दूर क्यों रहते हो जिन्दगी से तुम? बेखुदी की शक्ल में ढलते जा रहे हो! मुक्तककार – #मिथिलेश_राय »

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