एक अरसे से उनसे नजर नहीं मिली
जमाना गुजर गया किसी को देखे हुए
-पन्ना

 

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  • मेरी हर कोशिश तुम्हें पाने के लिए थी!
    तेरी जुल्फों के तले आने के लिए थी!
    लेकिन समझ न पाया मैं तेरी दिल्लगी,
    तेरी हर अदा तो तड़पाने के लिए थी!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • हमें दर्द जिंदगी में मिलते रहेंगे!
    हम राहे-मंजिलों पर चलते रहेंगे!
    डरते नहीं किसी से रंग मौसमों के,
    फूल तमन्नाओं के खिलते रहेंगे!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है
    —————————————-

    कोई एहसास दिल को छुआ है
    मुमकिन है,आपका आना हुआ है

    ख़्वाबों की धुन्ध छँटने लगी
    इक फ़साने का, हक़ीक़त होना हु […]

  • समझाये उन्हें क्या,
    जो अपनी बातों से मुकर गए ।

    वो करते रहे, गैरो की परवाह
    जिनके अपने आशियाने उजड़ गए ।

    कभी मिलोगे तुम, दिल से भी हमसे
    या मुहोब्बत के ज़माने गुजर गए…

    कुछ तो खास है,तेरे मेरे दरमिय […]

  • कुछ संघर्ष को भी सीख ले
    फिर जिंदगी को तू जीत ले,

    कभी मुश्किलों की हार से
    कभी तजुर्बे की मार से
    हौसला थोड़ा सा डिग जाएगा
    फिर भी तू लड़ता जाएगा

    कुछ संघर्ष को भी सीख ले
    फिर जिंदगी तू जीत ले […]

  • हंसकर अपने दर्द छुपाने की कारिगरी मसहूर थी मेरी ।
    चाहकर भी कभी रो ना सकी आंखे सजबूर थी मेरी ।।

    सजती रही महेफिले बेशक ही अब औरो की शाम मे ।
    हां मगर ये भी तो सच है वो शमा कभी जरूर थी मेरी ।। […]

  • जब तक है जीवन तब तक इस की सेवा ही आधार रहे

    विष्णु का अतुल पुराण रहे नरसिंह के रक्षक वार रहे

    हे प्राणनाथ! हे त्रयंबकम! शिव शंभू के शिव सार रहे

    हम रहे कभी ना रहे मगर इसकी प्रभुता का पार रहे […]

  • बिछड़ा जो फिर तुमसे तनहा ही रह गया,
    ग़म-ए-हिज़्र मे अकेले रोता ही रह गया।

    मुसलसल तसव्वुर में बहे आँसू भी खून के
    शब् में तुझे याद करता, करता ही रह गया!

    मैंने शाम ही से बुझा दिए हैं सब चराग,
    शाम […]

  • साहब की हवाई सैर पर एक
    मतला और एक शेर देखे।

    कू-ए-वतन में उड़न तश्तरी मोड़िये ना,
    साहब विदेश घूमने की जिद छोड़िये ना!
    इंसाफ दिलाके आसिफा की रूह को फिर,
    अनशन स्वाति मालिवाल का तोड़िए ना!

    तारिक़ अज़ीम ‘तनहा’

  • Tariq Azeem Tanha‘s profile was updated 5 days, 18 hours ago

  • नमस्कार दोस्तों आप सब देख रहे हैं आज कल बच्चियों के साथ कुछ बहेशी दरिन्दे जो कर रहे हैं दो शब्द आज लिखने पर मजबूर हो गया

    ऐसे कुकर्म करते जरा भी शर्म क्या तुझे नहीं आई।
    उसे देख तुझे अपनी बेटी याद क्या […]

  • सोज़िशे-दयार से निकल जाना चाहता हूँ,
    हयात से अदल में बदल जाना चाहता हूँ!

    तन्हाई ए उफ़ुक़ पे मिजगां को साथ लेके,
    मेहरो-माह के साथ चल जाना चाहता हूँ!

    आतिशे-ए-गुज़रगाह-ए-चमन से हटकर,
    खुनकी-ए-बहार में बदल जा […]

  • Kavi Manohar and Anjali Gupta are now friends 1 week ago

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