चमकता जिस्म, घनी जुल्फ़े, भूरी भूरी सी आंखे
यही है वो मुज़रिम जिसने कत्ल ए दिल किया है |

सावन काव्य प्रतियोगिता : मुखौटा का परिणाम

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Latest Activity

  • तुम कभी दिल से न रिश्ता तोड़ देना!
    तुम कभी तन्हा न मुझको छोड़ देना!
    मुश्किल है अब तुम बिन मेरी जिन्दगी,
    #राहे_दर्द पर न मुझको मोड़ देना!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • 1. Before I met you..
    I Don”t Understand “LOve Quotes”
    After I Met You
    I Strted Making It…..

    2. […]

  • मुझसे वो अब बड़ी तंगदिली से मिलता है
    ऐसे लगता है जैसे किसी अजनबी से मिलता है।।

    अब उसके मिलने में वो पहली जैसी बात कहाँ
    जमाने को दिखाने को ही शायद गले मिलता है।।

    ये तो हम ही है जिसे सब बेवफा समझते है
    उसक […]

  • मैं तेरा कबतलक इंतजार करता रहूँ?
    तेरी आरजू को बेकरार करता रहूँ?
    थक गयी हैं कोशिशें मेरी उम्मीदों की,
    मैं तेरे प्यार पर ऐतबार करता रहूँ?

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • Chahe ek lack log mil k,
    Mera bura soche,
    Bs ek tere acha sochne se,
    Sbki har ho jati hai..!!!

    #devil

  • “**मोह रही मन”**
    मोह रही मन सभी के
    फागुनी बयार ।
    शनैः शनेः उभर रहा है
    सृष्टि का निखार ।

    धडकनें सुवह की सरगमें
    सुहावनी।
    भावनाएँ रंगभरी हुईं
    लुभावनी ।

    कामनाओं पर चढ़ा
    छटा काअब खुमार ।

    ,”**प्रातः […]

  • रेत से बने इस रक्त के पुतले पर,
    रस्म ऐ रूह का रूतबा क्या कहूँ,

    बदलते रोज़ चेहरों के मुखौटे पर,
    जश्न ऐ जाम का कब्जा क्या कहूँ॥

    राही (अंजाना)

  • जब कभी तुम मेरी यादों में आते हो!
    धूप सा ख्यालों को हरबार जलाते हो!
    घुल जाती हैं साँसें चाहत के रंग में,
    चाँद की शकल में सामने आ जाते हो!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

  • जब कभी तुम मेरी यादों में आते हो!
    धूप सा ख्यालों को हरबार जलाते हो!
    घुल जाती हैं साँसें चाहत के रंग में,
    चाँद की शकल में सामने आ जाते हो!

    मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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