ओम पुरी जिन्दा है – बृजमोहन स्वामी

चलाओ टीवी,
भिन्डी काटती हुई अंगुली का
पसीना न पोंछते हुए
प्रेमिका को मिलाओ फोन,
बांटों दुःख
ओम पुरी चले गए,
सुनाओ निःशब्द
रो लो तीन सौ आँसू
लिखो डायरी में,
बदलो तस्वीरें
और बताओ खुद को

इतना खरा आदमी था
कि मौत में
बीमारी या दर्द की मिलावट नहीं की ऐसे आदमी को कैसे याद किया जा सकता है,
शायद उनकी पिछले सालों की
बुरी फिल्में देख कर?

काटो तो खून,
न काटो तो वक़्त
इंसान बस उतना ही होता,
जितना वह छोड़कर जाता

पर बार बार कैमरे के सामने
हल्की आवाज़ पर
ओम पुरी यह हिम्मत छोड़ कर गए
हिम्मत
जिसे हमने कभी नही परखी
गरीब और
बे-बाप लड़कों में देख सकते हैं,
और उधर मुम्बईया लोग
बार बार कुरेदते आपके सपने
“आप स्टार बन सकते हैं”

ओम पूरी एक युग थे
उम्मीद और इन्साफ़ का नेम प्लेट
डूबते दिल से
आखिरी रात,
मैंने सेट मेक्स पर
उन हाथों को सलाम किया
उन्हें चूमा,
उनकी दुनियां का आख़री साँस खिंचा
जैसे रो पड़े
मेरी माँ के हाथ…

ओम पुरी जिन्दा है
और दुनियां मर चुकी है।

om puri jinda hai, by- Brijmohan Swami

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1 Comment

  1. Profile photo of Brijmohan Swami

    Brijmohan Swami - July 10, 2017, 11:25 pm

    Oh

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