ज़िन्दगी……|

है ज़िन्दगी कहीं हर्ष,कहीं संघर्ष
कभी दुःखों की अवनति,कभी खुशियों का उत्कर्ष
ऐश्वर्य है ज़िन्दगी,कहीं है ज़िन्दगी परिश्रम
ज़िन्दगी का अर्थ लगाना ही–है मन का भ्रम

कहीं ज़िन्दगी बन जाती प्यार,कहीं नफ़रत
मानवता का पर्याय कभी-सत्संगों की चाहत
आशा की पूनम रात ,कभी निराशा की अंधियारी
भावनाओं की बहार है ज़िन्दगी ,कभी अकेली बेचारी

कठिनाईयों की दीवार ,कभी परेशानियोंकी पहाड़
शीतल छाया, कभी बसंत,कभी पतझड़ की ख़ुमार
बुराईयों की खान है, कहीं अच्छाई का खज़ाना
आँसूओं की बौछार है ज़िन्दगी, कभी हँसी का फ़साना

नाक़ामयाबी का शैलाब, कभी कामयाबी का गागर
धूप की तपी रेत, कभी–भीगी हरियाली की लहर
कहीं अनुभवों की ढ़ेर है ज़िन्दगी, कहीं प्रेरणाओं का स्रोत
काँटों सी दर्द है ज़िन्दगी, कहीं फूलों से ओत–प्रोत

कल्पनाओं की लम्बी धारा, कभी अनबुझी प्यास
तनावग्रस्त है ज़िन्दगी कभी–कभी सुखद एहसास
ज़िन्दगी है उल्लास, कभी कर्म–परिश्रम का आभास
मंज़िल प्राप्ति हेतु अथक प्रयत्न–संघर्ष का प्रयास

ईमान है ज़िन्दगी ,कभी सुक़ून की हेरा–फेरी
शांत-धीर,गम्भीर ज़िन्दगी-कहीं मची अफरा-तफरी
ज़िन्दगी देती है—हरपल ये सीख दोस्तो…..!
रैन–बसेरा है ज़िन्दगी–ये ना तेरी है ,ना मेरी…..||

—– रंजित तिवारी “मुन्ना”

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