ज़माने से बेपरवाह रहती है

ज़माने से बेपरवाह रहती है
दुनिया के दिखावे से अंजान है

माँ तू ऐसी क्यों है
जो मेरी खुशियों में अपनी खुशियाँ संजोए रहती है।।

– मनीष

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

amature writer,thinker,listener,speaker.

2 Comments

  1. ashmita - May 26, 2018, 12:42 pm

    nice

  2. शकुन सक्सेना - May 27, 2018, 11:47 am

    nice

Leave a Reply