ग़ज़ल-ऐ-शराब……

एक शराब की कहानी है ये
एक शराबी की जुबानी है ये

पीता है वो सुबह-शाम जी भर के
एक शराबी की ईमानदारी है ये

सुकून देती है ये बहुत दिल में जाने के बाद
एक शराबी की मन की मानी है ये

क्यों कोसते है अक्सर सभी इसको दुनिया में
एक शराबी की दिलबर जानी है ये

बहुत हँसीन पल हो जाते है इसको पीने के बाद
एक शराबी ने खुले-आम बात मानी है ये

Dev Kumar

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8 Comments

  1. सीमा राठी - April 2, 2017, 3:51 pm

    nice

  2. Mithilesh Rai - April 2, 2017, 9:44 pm

    वाह वाह बहुत खूब

  3. राही अंजाना - April 2, 2017, 10:06 pm

    nice

  4. Mithilesh Rai - April 3, 2017, 10:07 pm

    बेहतरीन सृजन

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