ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है

ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है
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कोई एहसास दिल को छुआ है
मुमकिन है,आपका आना हुआ है

ख़्वाबों की धुन्ध छँटने लगी
इक फ़साने का, हक़ीक़त होना हुआ है

सिसक रही तन्हाई भी हँस पड़ी
नज़र को नज़र का नज़राना हुआ है

तसल्ली ने दिया-दिल को यकीं-
इंतज़ार में पलों का सताना हुआ है

इज़हार को मचलने लगी क़शिश
सूना जीवन सुहाना हुआ है

ले हाथ सीने पर,आँहें भरे “रंजित”
ग़मगीन लम्हों का मुस्कुराना हुआ है

 

रंजित तिवारी
पटेल चौक,
कटिहार
पिन–854105
(बिहार)
मो-8407082012

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