ख़्वाब

रिश्तों के मन्ज़र चुप चाप देखने पड़े,
कई बार मुझे अपने ही ख्वाब तोड़ने पड़े।।
राही (अंजाना)

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6 Comments

  1. Mahtab - July 24, 2018, 7:25 pm

    bhut pyara hai
    bhut pyara ha

  2. Antariksha Saha - July 24, 2018, 7:54 pm

    awesome keep it going

  3. ज्योति कुमार - July 24, 2018, 9:49 pm

    Waah

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