होली की टोली

होली पे मस्तों की देखो टोली चली,
रँगने को एक दूजे की चोली चली,
भुलाकर गमों के भँवर को भी देखो,
आज गले से लगाने को दुनीयाँ चली,
हरे लाल पिले गुलाबी और नीले,
अबीर रंग खुशयों के उड़ाने चली,
भरकर पिचकारी गुब्बारे पानी के,
तन मन को सबके भिगाने ज़माने के,
हर गली घर से देखो ये दुनियां चली॥
राही (अंजाना)


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इलज़ाम

सरेआम रक्खे हैं।

बैठी है

बैठी है

जवाब माँगता है

1 Comment

  1. Shruti - March 7, 2017, 3:18 pm

    Waah holi hai

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