हाइकु

हथेली पर
सपनों की घड़ियाँ
साकार नहीं।

नदी के पार
रेत के बडे़ टीले
हवा नाचती।

अशोक बाबू माहौर

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1 Comment

  1. ashmita - December 4, 2018, 6:25 pm

    Aapko Kavita meri samaj se pare he…plz explain it also

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