हवा में घुल रहा आज जहर है

हवा में घुल रहा आज जहर है
सांसो को आज तरस रहा आज शहर है

बंद कमरे में कब तक कैद रहोगे
खुले आम घूम रहा आज कहर है

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

3 Comments

  1. ashmita - November 21, 2018, 8:37 am

    Nice

  2. ज्योति कुमार - November 22, 2018, 7:55 am

    Waah

  3. Neha - November 25, 2018, 3:39 pm

    good attempt

Leave a Reply