हवाओं का रुख

हवाओं के रुख से आहट पहचान ले कोई,

ऊँगली जो उठे तो मुट्ठी बाँध ले कोई,

कोई करे अनदेखी और बिन कहे सब जान ले कोई,

साफ़ नज़र आता है क्यों न इसे मोहब्बत मान ले कोई।।

राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

4 Comments

  1. देव कुमार - June 20, 2018, 2:01 pm

    Nice

  2. Neha - June 20, 2018, 2:04 pm

    Very nice

  3. Mithilesh Rai - June 20, 2018, 2:59 pm

    बहुत सुन्दर

  4. Mithilesh Rai - June 20, 2018, 2:59 pm

    बेहतरीन

Leave a Reply