स्वप्न

जब रात स्वप्न में मैं सोया था,
एक गहरे समन्दर में खोया था,
दूर दूर तक सच कुछ नहीं था,
मैं एक झूठी दुनियाँ में रोया था,
राही (अंजाना)

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3 Comments

  1. Neha - July 10, 2018, 4:16 pm

    very nice

  2. ज्योति कुमार - July 10, 2018, 5:22 pm

    वाह

  3. Arun - July 13, 2018, 12:20 pm

    Bha khub

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