सूरज

आजतक सूरज कितने अच्छे बुरे अनदेखे पलों का साक्षी है
पर उसकी चाल, उसके कर्म पर कभी कोई फर्क नहीं आया
हर सुबह उसी ऊर्जा और, उसी शक्ति के साथ निकलता है
बिना किसी भेदभाव, बिना अपेक्षा के प्रतिदिन निकलता है

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. राही अंजाना - July 21, 2018, 5:42 pm

    Wah

  2. ज्योति कुमार - July 21, 2018, 5:56 pm

    Waah kya baat hai

Leave a Reply