सूखे नहीं थे धार आंशु के, पड़ गए खेतों मे फिर सूखे

सूखे नहीं थे धार आंशु के
पड़ गए खेतों मे फिर सूखे 

सूखे नहीं थे धार आंशु के
पड़ गए खेतों मे फिर सूखे 

सूखे नहीं थे अरमान
आश के
फिर क्यू रूठा भगवान खवाब से

करता हूँ तुमसे निवेदन
इतना भी सितम न कर
रूठी है खाने की थाली
प्यालों मे भी कम है पानी
तू तो है सबका भाग्यभिधाता
मैं भी हूँ किसी का अन्नदाता

ले ले चाहे जो परीक्षा
आशा कभी न हारेंगे
सींच आशुओं से धरती को
फिर से धान उगाएँगे
सूखे भले हो खेत ये मेरे
हारा नहीं है होसला ये
मेरा

सूखे नहीं थे धार आंशु के

पड़ गए खेतों मे फिर सूखे
———-
-दिनेश कुमार-


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8 Comments

  1. Profile photo of Kumar Bunty

    Kumar Bunty - March 22, 2017, 10:43 pm

    BEHATREEN KOSHISH

  2. Profile photo of Sridhar

    Sridhar - March 6, 2017, 7:36 pm

    nice

  3. Profile photo of Ritu Soni

    Ritu Soni - March 6, 2017, 10:43 am

    Nice

  4. Profile photo of सीमा राठी

    सीमा राठी - March 6, 2017, 9:07 am

    अच्छा प्रयास दिनेशजी

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