“* सुवह को नमन “*

* सुवह को नमन “*
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प्यार के गीत गाती ,
वसंती सुवह को नमन ।
गंध बिखरा रही है ,
सुगंधी मित्रता का चमन ।

जानकी प्रसाद विवश

परम प्रिय मित्रो ,
प्यार की लाली बिखेरते
मधुर प्रभात का
प्यार भरा अभिवादन
सपरिवारसहर्ष , स्वीकार करें ।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

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