सावधान हों

**सावधान हों”**
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सावधान होकर रहें , विपदा- शूली राह ।
आतुरता करती सदा , जीवन भर गुमराह।।
अजी सब सावधान हों ,
नहीं व्यवधान कोई हो ।

*********जानकी प्रसाद विवश ******
* प्राण से प्यारे मित्रो,
प्यार बरसाते सवेरे की मधुर मंगलकामनाएँ सपरिवारसहर्ष स्वीकार करने की कृपा करें।

सादर,
सविनय
आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

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