सानिध्य

आओ वरण करो,मैं तुम्हारे सानिध्य में हूं
धरा में हूं या अंतरिक्ष में
आभास है तेरे प्रतिनिधित्व में हूं
नहीं पता किस लोक में हूं

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. ज्योति कुमार - July 16, 2018, 10:15 am

    Waah

Leave a Reply