सवेरे की मधुर मुसकान का

सवेरे की मधुर मुसकान का
अर्चन करें मन से ।
उजाले की अमर पहचान का ,
वंदन करें मन से ।
मित्रतामय उमंगों का चिर स्पंदन,
निराला है ,
नमन हो मित्रता तीरथ की महिमा
सकल तन मन से ।

जानकी प्रसाद विवश

प्यारे मित्रो ,
महिमामय सवेरे की
अशेष मंगलकामनाएँ ,
सपरिवारसहर्ष स्वीकार. करें ।

आपका अपना मित्र
जानकी प्रसाद विवश

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2 Comments

  1. Profile photo of ashmita

    ashmita - January 21, 2018, 7:43 pm

    Nice

  2. Panna - January 21, 2018, 3:17 pm

    अतिसुन्दर रचना

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