समझाये उन्हें क्या

समझाये उन्हें क्या,
जो अपनी बातों से मुकर गए ।

वो करते रहे, गैरो की परवाह
जिनके अपने आशियाने उजड़ गए ।

कभी मिलोगे तुम, दिल से भी हमसे
या मुहोब्बत के ज़माने गुजर गए…

कुछ तो खास है,तेरे मेरे दरमियां
यूँ तो बहुत मिले..कई बिछड़ गए

क्या बताये,क्या गुजरी हमपे साहिब
दिल मे रहने वाले
जब दिल से उतर गए,

ख्वाहिशें बहुत थी,तुझसे ऐ ज़िन्दगी,
जो समझें हम,तो मायने बदल गए ।

कवयित्री
राजनंदिनी रावत,ब्यावर(राजस्थान)

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

1 Comment

  1. Rajnandini Rawat - April 21, 2018, 8:13 pm

    Wow.. Nandini

Leave a Reply