संसार के बाजार में दहेज

संसार के बाजार में दहेज

इस जहांँ के हाट में ,

हर  चीज की बोली लगती है,

जीव, निर्जीव क्या काल्पनिक,

चीजें भी बिकती हैं,

जो मिल न सके वही ,

चीज लुभावनी लगती है,

पहुँच से हो बाहर तो,

चोर बाजारी चलती है,

हो जिस्म का व्यापार या,

दहेज लोभ में नारी पर अत्याचार,

धन पाने की चाहे में,

करता इन्सान संसार के बाजार में,

सभी हदों को पार,

दहेज प्रथा ने बनाया,

नारी जहांँ में मोल-भाव की चीज,

ढूँढ रही नारी सदियों से,

अपनी अस्तित्व की थाह,

सृष्टि के निर्माण में है,

उसका अमूल्य योगदान,

फिर भी देती आ रही,

अपनी अस्तित्व का प्रमाण,

सदियों से होती आ रही,

उसकी अस्मिता तार-तार,

फिर भी नहीं थकती,

न हारती, होती सशक्त हर बार,

ये संसार नहीं , चोरो  का है बाजार ,

लाख बनाए दुनिया दहेज को,

नारी को गिराने का हथियार,

नहीं मिटा ,न गिरा सकेगा,

नारी को कोई भी हथियार ।।

 


 

 

 

 

 


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 
यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|
 

8 Comments

  1. Profile photo of Nitesh Chaurasia

    Nitesh Chaurasia - March 17, 2017, 1:07 pm

    Nice one

  2. Profile photo of सीमा राठी

    सीमा राठी - March 16, 2017, 2:07 pm

    Nice one Ritu

  3. Kumar Bunty - March 15, 2017, 8:45 pm

    BEHATAREEN

  4. Shakun Saxena - March 15, 2017, 7:26 pm

    Badhiya

Leave a Reply