शीत के सबेरे में

शीत के सबेरे में ,
मित्रता की गर्माहट,
प्यार मोहब्बत के सूरज की,
सुनकर आहट ,
भावों के पंछी चहक उठते ।

अंगुलिया ठिठुर जाएँ ,
भावना उनींदी सी ,
प्यार के गरमागरम संदेश मगर लिखती हैं ।

– जानकी प्रसाद विवश

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2 Comments

  1. Yogi Nishad - January 8, 2018, 9:49 am

    बेहतरिन है

  2. Aarush Patel - January 8, 2018, 4:00 am

    Nice

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