शायरी

जो मेरा हो नहीं पाया , मैं उसको याद करता हूँ ,

फिर उसको भुलाने की भी मैं फ़रियाद करता हूँ

भुलाने के उसे मैं सौ बहाने ढूंढ लूँ चाहे

उसी का जिक्र सबसे मैं उसी के बाद करता हूँ ।

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2 Comments

  1. Ajay Nawal - March 22, 2017, 3:57 pm

    nice

  2. Urvashi Singh - March 23, 2017, 8:07 am

    nice

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