शहीदी

शहीदी

लगे मैले हर साल,
मालायें भी पहनायी फूलों की
पथरायी मूर्तियों को कई बार
मगर पत्थर की मूरत
कभी मुस्कुराई नहीं कभी
एक भी बार
पता नहीं क्यों!

 

 

Please like & share my poem

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. Pankaj Garg - March 23, 2017, 10:20 am

    NYC..

  2. Ankit Bhadouria - March 26, 2017, 11:43 am

    good 1…

Leave a Reply