शहीदी

शहीदी

लगे मैले हर साल,
मालायें भी पहनायी फूलों की
पथरायी मूर्तियों को कई बार
मगर पत्थर की मूरत
कभी मुस्कुराई नहीं कभी
एक भी बार
पता नहीं क्यों!

 

 

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2 Comments

  1. Pankaj Garg - March 23, 2017, 10:20 am

    NYC..

  2. Ankit Bhadouria - March 26, 2017, 11:43 am

    good 1…

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