वक़्त

ऐ वक़्त तू कितने रंग बदले,
बह रही हो सृजन धार
क्यों प्रलय बन निकले
तू कितने रंग बदले

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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3 Comments

  1. Arun - July 10, 2018, 11:52 pm

    Kya khoob likha hai

  2. Akanksha - July 12, 2018, 8:24 pm

    Bhut khoob

  3. Vinita Shrivastava - July 18, 2018, 6:13 pm

    धन्यवाद

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