लाल

देखो सपूतों इस धरा पर,
पैर न गैर जमने पाए

कोई न अब लाल बिछड़े ,
कोई मांग उजड़ न पाए

–विनीता श्रीवास्तव (नीरजा नीर)–

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4 Comments

  1. Vijayanand V Gaitonde - July 2, 2018, 7:17 pm

    वाह , सुन्दर, बधाई …!

  2. राही अंजाना - July 4, 2018, 3:28 pm

    वाह

  3. Akanksha - July 22, 2018, 12:09 pm

    Uttam

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