रेत से बने इस रक्त के पुतले पर

रेत से बने इस रक्त के पुतले पर,
रस्म ऐ रूह का रूतबा क्या कहूँ,

बदलते रोज़ चेहरों के मुखौटे पर,
जश्न ऐ जाम का कब्जा क्या कहूँ॥

राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कहानी प्रतियोगिता


समयसीमा: 24 फ़रवरी (सन्ध्या 6 बजे)

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. Shakun Saxena - February 14, 2018, 4:03 pm

    Thank you chacha

  2. Ashok Sharma - February 12, 2018, 11:48 pm

    बहुत सुंदर कविता है आपकी

Leave a Reply