रिश्ते

रिश्ते रूह में अब बंधा नहीं करते,
वो हमसे हम उनसे कुछ कहा नहीं करते,
मान लिया है मैंने के बस एक जिस्म हूँ मैं,
और टूटे दिल को हम कभी सिया नहीं करते।।
राही (अंजाना)

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

2 Comments

  1. ज्योति कुमार - September 10, 2018, 11:18 pm

    Nice

Leave a Reply