यूँ तो नज़रन्दाज़ नहीं करते लोग खामियाँ मेरी

यूँ तो नज़रन्दाज़ नहीं करते लोग खामियाँ मेरी,
तो मैं भी क्यूँ दिखाऊं खुलकर उनको खूबियां मेरी,
अभी सीख रहा हूँ तैरना तो हंसी बनाने दो मेरी,
जब डूब कर समन्दर से निकल आऊंगा तो देखेंगे वो करामात मेरी॥
राही (अंजाना)

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5 Comments

  1. ज्योति कुमार - July 4, 2018, 10:00 am

    बहुत अच्छा

  2. Vinita Shrivastava - July 4, 2018, 1:24 pm

    sundar 🙂

  3. Chetan Pujara - July 4, 2018, 7:57 pm

    Nice Uncle Ji🙂

  4. राही अंजाना - July 4, 2018, 10:54 pm

    Thank you

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