मोहब्बत

मोहब्बत

मोहब्बत के ख्वाब ने ये कैसा इत्तेफ़ाक कर दिया,

दिल्लगी ने धड़कन को ही दिल के खिलाफ़ कर दिया,

अच्छी ख़ासी तो चल रही थी ज़िन्दगी ‘राही’ अपनी,

फिर क्या हुआ जो इस नशे ने तुम्हें ख़ाक कर दिया।।

राही (अंजाना)

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2 Comments

  1. ज्योति कुमार - September 30, 2018, 4:08 pm

    Waah kya bat bole hai

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