Glasses-of-wine-002

मेरे साकी

तुम्हारी चाह ही मंज़िल हमारी ए मेरे साकी,
ज़रा अब तो पिला दे न , तमन्ना अब भी है बाक़ी.
मेरे साकी तेरे आँखों की मदिरा क्या बताऊँ मैं,
फ़क़त आँखों से चढ़ती है ,मगर दिल तक उतरती है ,
उतरना फिर भी वाज़िब था मगर अब ये लगा है कि,
उतरकर भी ये चढ़ती है , और चढ़ के फिर उतरती है .

 

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Hi everyone. This is Abhishek from Varanasi.

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14 Comments

  1. anupriya sharma - October 16, 2015, 5:45 pm

    nice

  2. Panna - October 16, 2015, 5:14 pm

    उम्दा…लाजबाव

  3. Profile photo of Mohit Sharma

    Mohit Sharma - October 16, 2015, 1:56 am

    ek baaji tum haar gaye the pichli baar BAR mein…….vo baaji abhi hai baaki

  4. Profile photo of Ajay Nawal

    Ajay Nawal - October 16, 2015, 1:47 am

    एक प्यास लेकर गये मैखाने हम…….
    प्याले पे प्याले पीये, मगर प्यास है बाकी |

  5. Anjali Gupta - October 15, 2015, 8:13 pm

    wonderful lines yaar

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