मुक्तक

मैं तेरी गुफ्तगूं की राह ढूंढ़ता रहता हूँ।
मैं तेरी ज़ुल्फ़ों की पनाह ढूंढ़ता रहता हूँ।
जब भी नज़र में आती हैं तस्वीरें यादों की-
मैं अपनी मयकदों में आह ढूंढ़ता रहता हूँ।

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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Lives in Varanasi, India

2 Comments

  1. राही अंजाना - August 9, 2018, 6:43 pm

    Waah

  2. ज्योति कुमार - August 9, 2018, 8:11 pm

    Super

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