मुक्तक

कभी तो किसी शाम को घर चले आओ।
कभी तो ग़मों से बेख़बर चले आओ।
हर रात बीत जाती है मयखाने में-
कभी तो रास्ते से मुड़कर चले आओ।

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

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1 Comment

  1. ज्योति कुमार - August 25, 2018, 7:40 am

    Waah sir

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