मुक्तक

मैं ख़ुद की तरह ज़ीने का जुनून रखता हूँ।
मैं दिल में अरमानों का मज़मून रखता हूँ।
हौसला क़ायम है अभी दर्द को सहने का-
मैं ख़ुद में तूफ़ानों को मक़नून रखता हूँ।

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in Varanasi, India

3 Comments

  1. राही अंजाना - August 1, 2018, 6:07 pm

    Waah

  2. Neha - August 1, 2018, 8:04 pm

    Waah

  3. ज्योति कुमार - August 3, 2018, 9:33 pm

    वाह क्या बात है।

Leave a Reply