मुक्तक

क्यों तुम शमा-ए-चाहत को बुझाकर चले गये?
क्यों तुम मेरी ज़िन्दग़ी में आकर चले गये?
हर ग़म को जब तेरे लिए सहता रहा हूँ मैं-
क्यों तुम मेरे प्यार को ठुकराकर चले गये?

मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

Previous Poem
Next Poem
Spread the love

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Lives in Varanasi, India

2 Comments

  1. राही अंजाना - July 21, 2018, 5:42 pm

    Gjb

  2. ज्योति कुमार - July 21, 2018, 5:54 pm

    Koi jaura nahi sir

Leave a Reply